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बाली बुड को एक और झटक मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का निधन

बाली बुड को एक और झटक मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का निधन

File Pic

मुंबई : मशहूर कोरियॉग्रफर सरोज खान का शुक्रवार देर रात कार्डियक अरेस्ट के चलते मुंबई में निधन हो गया। वह 72 साल की थीं। सरोज खान 17 जून से मुंबई के बांद्रा में स्थित गुरु नानक हॉस्पिटल में भर्ती थीं। उन्हें सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद यहां भर्ती कराया गया था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक आज रात 1.52 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। मुंबई के चारकोप कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएग

वह लंबे समय से अपने काम से ब्रेक पर थीं लेकिन बीते साल (2019) उन्होंने वापसी की और मल्टीस्टारर फिल्म ‘कलंक’ और कंगना रनौत की फिल्म ‘मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी’ में एक-एक गाने को कोरियॉग्राफ किया था।

बता दें इस दिग्गज कोरियॉग्राफर ने मात्र तीन साल की उम्र से बतौर बैकग्राउंड डांसर अपना करियर शुरू किया था। उन्हें 1974 में पहली बार गीता मेरा नाम से बतौर कोरियॉग्राफर फिल्म इंडस्ट्री में ब्रेक मिला था। अपने करियर में 2000 से ज्यादा गानों को कोरियॉग्राफी करने वालीं इस दिग्गज को तीन बार नैशनल अवॉर्ड मिला। बता दें कि सरोज खान ने कुछ फिल्मों में बतौर राइटर भी काम किया है। उन्होंने माधुरी दीक्षित और श्रीदेवी सहित बॉलीवुड के कई कलाकारों को डांस सिखाया।

सरोज खान ने करीब सैकड़ों गानों को कोरियोग्राफ किया था। कम ही लोगों को पता है कि सरोज खान का असली नाम निर्मला नागपाल था। सरोज के पिता का नाम किशनचंद सद्धू सिंह और मां का नाम नोनी सद्धू सिंह था। विभाजन के बाद सरोज खान का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था। सरोज ने महज तीन साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। उनकी पहली फिल्म नजराना थी जिसमें उन्होंने श्यामा नाम की बच्ची का किरदार निभाया था।

50 के दशक में सरोज खान ने बतौर बैकग्राउंड डांसर काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने कोरियोग्राफर बी.सोहनलाल के साथ ट्रेनिंग ली। 1974 में रिलीज हुई फिल्म गीता मेरा नाम से सरोज खान एक स्वतंत्र कोरियोग्राफर की तरह जुड़ीं हालांकि उनके काम को काफी समय बाद पहचान मिली। सरोज खान की मुख्य फिल्मों में मिस्टर इंडिया, नगीना, चांदनी, तेजाब, थानेदार और बेटा हैं।

सरोज खान ने पहले मास्टर बी. सोहनलाल से शादी की थी। दोनों की उम्र में 30 साल का अंतर था। शादी के वक्त सरोज की उम्र 13 साल थी। इस्लाम धर्म अपना कर उन्होंने 43 साल के बी. सोहनलाल से शादी की। सोहनलाल की ये दूसरी शादी थी। पहली शादी से उनके चार बच्चे थे। सरोज खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘मैं उन दिनों स्कूल में पढ़ती थी तभी एक दिन मेरे डांस मास्टर सोहनलाल ने गले में काला धागा बांध दिया था और मेरे शादी हो गई थी।’

एक टीवी चैनल के साथ इंटरव्यू में सरोज खान ने बताया था कि ‘मैंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपनाया था। उस वक्त मुझसे कई लोगों ने पूछा कि मुझ पर कोई दबाव तो नहीं है लेकिन ऐसा नहीं था। मुझे इस्लाम धर्म से प्रेरणा मिलती है।’

सरोज खान से शादी के वक्त सोहनलाल ने अपनी पहली शादी की बात नहीं बताई थी। 1963 में सरोज खान के बेटे राजू खान का जन्म हुआ तब उन्हें सोहनलाल की शादीशुदा जिंदगी के बारे में पता चला। 1965 में सरोज ने दूसरे बच्चे को जन्म दिया लेकिन 8 महीने बाद ही मौत हो गई। बच्चों के जन्म के बाद सोहनलाल ने उन्हें अपना नाम देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच दूरियां आ गईं। सरोज की एक बेटी कुकु भी हैं। सरोज ने दोनों बच्चों की परवरिश अकेले ही की।

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