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भारत में सेना के भगोड़े जवानों को मदद करने वालों को क्या सजा दी जाती है, यहां पढ़िए –

भारत में सेना के भगोड़े जवानों को मदद करने वालों को क्या सजा दी जाती है, यहां पढ़िए –

राष्ट्रीय जगत विजन 6 जनवरी 2021

युद्ध में से पीठ दिखाकर भागना वीरता नहीं एक कायरता होती है। जब कभी सीमाओं पर युद्ध के बादल मंडराने लगते हैं तो कुछ कायर सिपाही देश की सीमा को खतरे में छोड़ कर भाग जाते हैं। ऐसे भगोड़े सैनिक को सेना एक्ट के अंतर्गत दाण्डित किया जाता है लेकिन जो लोग ऐसे कायर सैनिकों को आश्रय देते हैं या छुपने में मदद करते हैं ऐसे आम नागरिकों को सेना एक्ट के तहत दंडित नहीं किया जा सकता परंतु भारतीय दंड संहिता में इस तरह के लोगों को सजा दिए जाने का प्रावधान है।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 136 की परिभाषा:-
अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर आर्मी, नेवी, एयर फोर्स के सैनिक या कोई सेना का ऑफिसर जो ड्यूटी पर से भाग जाते हैं या अपने कतर्व्य का पालन नहीं करते हैं ऐसे सैनिक या अधिकारी को जो छिपायेगा या आश्रय देगा वह धारा 136 के अंतर्गत दोषी होगा।
【नोट:- सैनिक की पत्नी द्वारा सैनिक को छुपा लेना अपराध नहीं माना जायेगा】

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 136 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-
इस धारा के अपराध किसी भी प्रकार से समझौता योग्य नहीं होते हैं, यह अपराध संज्ञेय एवं जमानतीय अपराध होते हैं। इनकी सुनवाई का अधिकार किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट को होता है। सजा-इस अपराध के लिए दो वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनो से दाण्डित किया जा सकता है। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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