Breaking News

अरपा नदी में बनने जा रहे दो बड़े बैराज अधिकारियों की लापरवाही से बनने से पहले ही भर्ष्टाचार की भेंट चढ़ाने की तैयारी ……………जानकर आप सब हो जायेंगे हैरान, पढ़ें पूरी खबर

अरपा नदी में बनने जा रहे दो बड़े बैराज अधिकारियों की लापरवाही से बनने से पहले ही भर्ष्टाचार की भेंट चढ़ाने की तैयारी ……………जानकर आप सब हो जायेंगे हैरान, पढ़ें पूरी खबर

राष्ट्रीय जगत विजन 12 जनवरी 2021

बिलासपुर : शहर के अरपा नदी पर दो बैराज का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है जिसका वर्तमान में स्वीकृति भी शासन से मिल गया है। जिसकी चौड़ाई लगभग 300 मीटर है । जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के द्वारा की गई है । जिसकी प्रशासकीय स्वीकृति भी आनन-फानन में ले ली गई है । जिसकी राशि 50, 50 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी करा लिया गया है । अब जब इस बैराज की तकनीकी स्वीकृति की बारी आई तो यह निर्माण इतनी कम कीमत पर होना संभव नहीं था। विभाग द्वारा पुनः प्रशासकीय स्वीकृति लेने हेतु शासन को भेजने पर अधिकारियों की गलती और भ्रष्टाचार का साफ साफ पता चल जाता और अधिकारियों की पोल खुल जाती , इसके चलते यह भले ही तकनीकी रूप से पुरा का पुरा स्ट्रक्चर गलत है फिर भी निर्माण करने के लिए टेंडर लगा दिया गया था। और 15 % कम दर पर ठेकेदार सुनील अग्रवाल को दे दिया गया आपको हम यह भी बता देना चाहते हैं यह वही सुनिल अग्रवाल है जो अरपा भैसाझार बैराज को बनाया है आप को ज्ञात होगा अरपा भैसाझार कोटा, तखतपुर और बिल्हा तक गया है । और सिंचाई के नाम 10 हजार हेक्टेयर बताया जा रहा है जबकि यह भी फर्जी रिपोर्ट बनाकर पेश कर दिया गया है। जबकि 25 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होना था । जिसकी मियाद निर्माण करने की 36 माह का था ।और आज 8 वर्ष हो गया जिसकी शुरूआत की लागत 6 सौ 6 करोड रूपए था । जो आज बढ़कर आज 1250 करोड रूपए हो गया है । इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। की इस अरपा भैंसाझार बैराज में कितने बड़े पैमाने पर भर्ष्टाचार किया गया है । और ऐसे ठेकेदार को एक बार फिर से अरपा नदी में बैराज बनाने का अब टेंडर स्वीकृत कराने की तैयारी शुरू हो गया है। जिसे निर्माण करने की स्वीकृति दे दिया गया।

आपको यह बताना जरूरी हो जाता है कि आप यह समझ सके की यह बनने जा रहे बैराज की ड्राइंग और डिजाइन कैसे गलत है । अरपा नदी में पूर्व में दो बड़े निर्माण बैराज के रूप में हो चुका है जो निम्नलिखित है

1,आसपुर डायवर्शन स्कीम जिसकी चौड़ाई लगभग 120 मीटर है और लागत ₹15 करोड़ है ।

2, सलका डायवर्सन जिसकी चौड़ाई लगभग 100 मीटर है और लागत लगभग 20 करोड है।

3,लछनपुर डायवर्सन स्कीम जिसकी चौड़ाई लगभग 130 मिटर है और लागत लगभग 25करोड है ।

4, आमा मुडा डायवर्सन स्कीम जिसकी चौड़ाई लगभग 150 मिटर है। जिसकी लागत लगभग 100करोड है।

नदी में यह उपरोक्त पांचों बैराज का पानी भराव की क्षमता लगभग 5 मीटर है । जो काफी बड़ा स्ट्रक्चर कहलाता है। और यह सफलता पूर्वक खड़े हैं । उसका कारण है हाई रॉक में उसके पियर को स्थापित करना जिसको किया गया है। जबकि इससे पहले दो निम्नलिखित संरचनाएं बनाया जा चुका है और वह दोनों एनीकट बह चुका है।

1, चांटा पारा एनिकट जिसकी चौड़ाई लगभग 130 मीटर है और लागत 7 करोड़ है

2,सोनपुर नगोई एनिकट जिसकी चौड़ाई लगभग 100 मीटर है जिसकी लागत 6 करोड़ है।

आपको मैं यह बताना चाह रहा हूं कि उपरोक्त दिए गएउपरोक्त दिए गए दोनों एनीकट में पानी भराव की क्षमता 1. 5 मीटर है । नये बनने जा रहे बैराज की तुलना में यह काफी छोटा निर्माण है।जो रेत में निर्मित थे जिसकी वजह से यह दोनों एनीकट बह गए, एसडीओ और सब इंजीनियर को खाना पूर्ति करते हुए सस्पेंड कर दिया गया । और जांच के नाम पर मात्र खानापूर्ति कर लीपापोती कर दिया गया है । किसी के ऊपर कोई अन्य कोई भी कार्यवाही नहीं किया गया है। वर्तमान में बिलासपुर में बनने जा रहे दो बड़े बैराज की ड्राइंग और डिजाइन पूर्व में बहे हुए दो एनीकट जैसी ही है ।इसमें और पूर्व में बनाये गए एनिकट में कोई भी अंतर नहीं है । अरपा नदी पर यह बनने वाले बैराज पर जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ एक्सपेरिमेंट करने जा रहा है। जो इतना बड़ा बैराज को रेत के ऊपर में स्थापित करने जा रहा है । बिलासपुर की जनता के ऊपर ही ऐसा ही एक्सपेरिमेंट क्यों किया जा रहा है। इस बैराज को किसी बड़े आईआई टी रुड़की या खड़कपुर से सलाह लेकर करानी चाहिए थी क्योंकि अभयराज में जल भराव क्षमता लगभग 4.5 मीटर होना है जो बड़े बैराज में आता है जबकि 1 पॉइंट 5 मीटर जलभराव वाले निकट पहले से ही फेल हो चुके हैं इस तरह से या बनाए जा रहे दोनों बैराज पूरी तरह से फेल और भ्रष्टाचार की बलि चढ़ने जा रहा है इस पर एसडीओ और ऐसी सभी की मिलीभगत साफ झलक रही है और इसकी ड्राइवर डिजाइन पूरी तरह फेल है । एक बार पुनः सरकार को गुमराह कर भ्रष्टाचार कर जनता के पैसे का बंदरबांट करने की तैयारी चल रही है ।इस बैराज की ड्राइंग और डिजाइन की किसी बड़े इंजीनियरिंग ‌सेंटर से पूरी तरह से जांच कराया जाएं और दोषियों पर कार्रवाई कर नए सिरे से ड्राइंग और डिजाइन बनाकर उक्त कार्य को कराया जाना उचित होगा। आपको ज्ञात होगा की इसकी तकनिकी स्वीकृति चीफ इंजीनियर सोमवार के द्वारा दिया गया है। जो खुद चार दिन का विभाग में मेहमान है ।जो खुद फर्जी जाति मामले में फसा हुआ है और न्यायालय से स्टे लेकर बच्चे हुए जिनको राज्य शासन के द्वारा फर्जी जाति मामले में दोषी करार दिया जा चुका है। दूसरा इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता रामास्वामी नायडू एक वर्ष के भीतर रिटायर्ड होने वाले हैं। और ई आर पी शुक्ला भी 8 माह के विभाग में मेहमान है उसके बाद वो भी रिटायर्ड हो जायेंगे पर इस बैराज में होने जा रहा खामियों, लापरवाहीयों का खामियाजा बिलासपुर की जनता भुगतनें को एक बार फीर से तैयार रहें।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *