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टैक्टर रैली के नाम पर अराजक तत्वों का तांडव: लाल किले की छोटी प्राचीर पर पंथ विशेष का झंडा लहराया..केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर आपात बैठक जारी.. इंटरनेट सेवाएँ बंद.. आठ मैट्रो स्टेशन भी बंद.. कोई रास्ते बंद

टैक्टर रैली के नाम पर अराजक तत्वों का तांडव: लाल किले की छोटी प्राचीर पर पंथ विशेष का झंडा लहराया..केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर आपात बैठक जारी.. इंटरनेट सेवाएँ बंद.. आठ मैट्रो स्टेशन भी बंद.. कोई रास्ते बंद

राष्ट्रीय जगत विजन 26 जनवरी 2021

नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस के मौक़े पर देश की राजधानी में किसानों के ट्रेक्टर रैली के नाम पर कथित अराजक तत्व किसानों के समूहों ने एक प्रकार से दिल्ली में अराजकता फैला कर रख दी। देश के प्रमुख पर्वों में से एक गणतंत्र दिवस के मौक़े पर किसानों के नाम पर दिल्ली के भीतर जा पहुँचे उपद्रवियों ने पुलिस पर हमला बोला, गाड़ियों को तोड़ा, खुले तौर पर तलवारें लहराई गई। सबसे शर्मनाक वाक़या तब हुआ जबकि लाल क़िले की मुख्य प्राचीर से लगे छोटे स्तंभ पर पंथ विशेष का ध्वज लहरा दिया गया। कथित रुप से किसान बताने वाले इन समूहों ने लाल क़िले पर घंटो क़ब्ज़ा किए रखा। उपद्रवी लाल क़िले समेत नांगलोई और कई जगहों पर लगातार उत्पात कर रहे हैं।
लाल क़िले की प्राचीर पर पंथ विशेष का झंडा लगाए जाने और कई जगहों पर पुलिस पर हमले की खबरों के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्वाभाविक रुप से बेहद सख़्त रवैया अपनाने के संकेत दिए हैं। क़रीब आठ मेट्रो स्टेशन समेत पाँच इलाक़ों में इंटरनेट सेवाएँ मध्य रात्रि तक के लिए बंद कर दी गई है।
अब से कुछ ही देर पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निवास पर आपात बैठक शुरु हो चुकी है।खबरें हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे मामले को लेकर सख़्त नाराज़गी जताते हुए सख़्ती से निपटने के आदेश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार क़रीब बारह मामले बेहद गंभीर धाराओं में दर्ज किए जा रहे हैं।
विवाद तब शुरु हुआ जबकि किसान पूर्व निर्धारित ट्रेक्टर मार्च के रास्ते पर जाने के बजाए प्रतिबंधित रास्तों पर बढ़ते हुए दिल्ली के भीतर जाने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने उन्हें रोका जिसके बाद विवाद शुरु हो गया।
इसके बाद विवाद ने वह रुप लिया कि देश का 72 वाँ गणतंत्र दिवस देश की राजधानी दिल्ली में बेहद शर्मनाक स्वरुप बन गया। आपको बता दें किसानों की तरफ से यह भी बातें सामने आ रही है अगर सरकार किसानों को दबाने और उन पर अपराध दर्ज किया गया तो यह किसानों का आंदोलन विकराल रूप ले सकता है ।

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