सोम. सितम्बर 23rd, 2019

यहां प्रेमियों की रक्षा करते हैं स्वंय महादेव, प्रेमी युगल की खातिरदारी में लगे रहते हैं मंदिर के पंडित

यहां प्रेमियों की रक्षा करते हैं स्वंय महादेव, प्रेमी युगल की खातिरदारी में लगे रहते हैं मंदिर के पंडित

मान्यता है कि महाभारत में अज्ञातवास के समय पांडव यहां कुछ समय के लिए रुके थे।

हिमाचल प्रदेश जितना अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण जाना जाता है उतना ही यहां की परंपराओं के कारण भी। आज हम आपको बता रहे हैं कुल्लू के शांघड़ गांव के देवता शंगचुल महादेव के बारे में जो घर से भागे प्रेमी जोड़ों को शरण देते हैं। शांघड़ गांव कुल्लू की सेंज वैली में है। पांडव कालीन शांघड़ गांव में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इन्हीं में से एक हैं यहां का शंगचुल महादेव मंदिर। यहां डलहौजी के खजियार की तरह ग्रास फील्ड है।

शंगचुल देवता का मंदिर

मान्यता है कि शंगचुल महादेव की सीमा में किसी भी जाति के प्रेमी युगल अगर पहुंच जाते हैं तो फिर जब तक वह इस मंदिर की सीमा में रहते हैं उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यहां तक कि प्रेमी युगल के परिजन भी उनसे कुछ नहीं कह सकते हें। शंगचुल महादेव मंदिर का सीमा क्षेत्र करीब 100 बीघा का मैदान है। जैसे ही इस सीमा में कोई प्रेमी युगल पहुंचता है वैसे ही उसे देवता की शरण में आया हुआ मान लिया जाता है।

दोबारा किया गया है मंदिर का निमार्ण

यह मंदिर जल गया था इसका निर्माण दोबारा किया गया है। अपनी विरासत के नियमों का पालन कर रहे इस गांव में पुलिस के आने पर भी प्रतिबंध है। इसके साथ ही यहां शराब, सिगरेट और चमड़े का सामान लेकर आना भी मना है। न कोई हथियार लेकर यहां प्रवेश कर सकता है और न ही किसी प्रकार का लड़ाई झगड़ा तथा ऊंची आवाज में बात भी नहीं कर सकता है। यहां देवता का ही फैसला मान्य होता है। मंदिर के पंडित प्रेमी युगलों की खातिरदारी करते हैं।

शंगचुल देवता का एरिया

मान्यता है कि महाभारत में अज्ञातवास के समय पांडव यहां कुछ समय के लिए रुके थे। कौरव उनका पीछा करते हुए जब यहां आए तो शंगचुल महादेव ने कौरवों को रोककर कहा कि यह मेरा क्षेत्र है और जो भी मेरी शरण में आएगा उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। यह सुनकर कौरव लौट गए थे।

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