May 18, 2024

राष्ट्रीय जगत विजन छत्तीसगढ़ : ये औरत निकलने वाली है ? जनता की फूली सांसे, साहब का भी दिल करने लगा धक-धक, कई IAS और IPS अधिकारियो की नींद हराम, जेल से बाहर आने वाली है, छत्तीसगढ़ की लेडी डॉन…

राष्ट्रीय जगत विजन छत्तीसगढ़ : ये औरत निकलने वाली है ? जनता की फूली सांसे, साहब का भी दिल करने लगा धक-धक, कई IAS और IPS अधिकारियो की नींद हराम, जेल से बाहर आने वाली है, छत्तीसगढ़ की लेडी डॉन…


रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ एक बार फिर सुर्खियों में है, देशभर में मनी लांड्रिंग और राजनैतिक अपराधों के लिए जाने पहचाने जाने वाले इस राज्य में कभी भी हत्याओं का दौर शुरू हो सकता है, प्रदेश के राजनैतिक और प्रशासनिक हालात को देख कर अंदेशा तो यही जाहिर किया जा रहा है। बताते है कि राज्य में दोनों ही क्षेत्रों की कमान संगठित आपराधिक गिरोह के “हाथो” में बताई जा रही है।

बताते है कि राजनैतिक अपराधियों के लिए एक बार फिर स्वर्णिम अवसर का दौर शुरू हो गया है। राज्य के प्रभावशील नागरिकों, नौकरशाहों और राजनेताओं को एक बार फिर 20 बरस पहले जैसे हालातो का सामना करना पड़ रहा है, अंदेशा तो यह भी जाहिर किया जा रहा है कि राज्य में जग्गी हत्याकांड जैसा कोई नजारा फिर देखने को मिल सकता है। बताते है कि कांग्रेस के भीतर मची उथल-पुथल से जग्गी हत्याकांड जैसी कोई बड़ी वारदात दोहराई जा सकती है।

बताया जा रहा है कि पुलिस, प्रशासन, पत्रकारिता, राजनीति, उद्योग धंधों, कारोबार, IT-ED, CBI और सत्ता के शीर्ष से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े किसी भी शख्स की जान कभी भी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई आपराधिक गिरोह राज्य में सक्रीय बताये जाते है।

सूत्र दावा कर रहे है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथो में खेल रहे कई संदेही मुंबई के शूटरों के संपर्क में है। उनके मुताबिक प्रदेश के दिनों दिन ख़राब होते हालात से पुलिस-प्रशासन और नौकरशाही में आपराधिक तत्वों के मेल मिलाप से कई साजिशो और राजनैतिक हत्याओं की बू आ रही है।

बताते है कि सुपर सीएम अनिल टुटेजा और मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ सौम्या चौरसिया के साथ कई IAS और IPS अधिकारी उस शख्स को निपटाने में सक्रीय हो गए है, जो साहब के मुख्यमंत्री पद को चुनौती दे रहे है। उनकी राह में कांटे बिछाने में जुटे है, IT-ED और CBI जैसी गंभीर केंद्रीय एजेंसियों को राष्ट्र विरोधी तत्वों की तस्दीक कर रहे है, गवाही दे रहे है, उनके गुनाहो और भ्रष्टाचार को उजागर कर सरकारी तिजोरी की रक्षा कर रहे है।

बताया जाता है कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री बनने के लिए गला काट स्पर्धा चल रही है, रायपुर से लेकर दिल्ली तक कई नेताओं की नियमित आवाजाही से गुटीय राजनीति उफान पर है। कांग्रेस आलाकमान के सामने विधान सभा चुनाव से पूर्व मुख्यमंत्री का चेहरा बनने के लिए होड़ मची है, सूत्र बताते है कि वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नए चेहरे मैदान में है, इसके चलते साहब के माथे पर बल पड़ गया है।

बताते है कि राजनीतिक संघर्ष के बीच कई आपराधिक तत्व सक्रिय हो गए है, सूत्र यह भी दावा कर रहे है कि रायपुर सेंट्रल जेल में बंद सुपर सीएम सौम्या चौरसिया कई अंतर्राज्यीय आपराधिक गिरोह के संपर्क में है, जेल में उसे फाइव स्टार सुविधा उपलब्ध करा रहे संदेही जेल अधिकारियों ने मोबाईल और अन्य संसाधनों से उसकी मुंबई के कुछ शूटरों से बातचीत कराई है। राज्य में आपराधिक सक्रियता बढ़ गई है।

देखते ही देखते प्रदेश के कई जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर पुलिस और प्रशासन को दो-चार होना पड़ रहा है, अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि राज्य में कभी भी अप्रिय वरदाता से इंकार नहीं किया जा सकता। चर्चा है कि राज्य में आपराधिक घटनाओ का स्वर्णिम युग चल रहा है, कई मौको पर पुलिस के हाथ भी पेशेवर सफ़ेदपोश अपराधियों की तीमारदारी में सरकारी कर्तव्यों का निर्वहन करते नजर आ रहे है। आमतौर पर अशांत राज्यों में ऐसा नजारा देखने को मिलता है, लिहाजा कानून के रखवालो की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे है।

सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि जेल एक्ट के उल्लंघन में जुटे अधिकारियो की मदद से कई पुराने पेशेवर आपराधियो के रिकार्ड का जायजा लेने और उनके साथ संपर्क स्थापित करने को लेकर सौम्या का वक्त गुजर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2023 में दोबारा सत्ता हथिया कर साहब को सीएम बनाने के लिए अभियुक्त सौम्या चौरसिया जोर शोर से जुटी हुई है। इस कार्य में उसकी मदद के लिए कई ऐसे तत्व सक्रिय को गए है, जिनकी साहब के दरबार में किचन एंट्री बताई जाती है।

यह भी बताया जा रहा है कि साहब के लिए राजनीतिक बाधा उत्पन्न करने वालो को सबक सिखाने के फरमान जारी किए गए है, विशेष कार्य योजना के तहत जेल में निरुद्ध पेशेवर अपराधियों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया गया है। उनकी रिहाई के लिए बघेलखंड पुलिस-प्रशासन और न्यायपालिका के ऐसे न्यायिक अधिकारियों को सूचीबद्ध किया गया है,जो साहब के हितों का ध्यान रखने में कभी पीछे नहीं रहे।

सूत्रों के मुताबिक रायपुर के पूर्व जिला जज और मौजूदा विधि सचिव राम कुमार तिवारी की गुड बुक में शामिल न्यायाधीशों का नाम इस सूची में अव्वल नंबर पर बताया जाता है। चर्चा है कि राम कुमार तिवारी भी अपने साले सूर्यकान्त तिवारी की तर्ज पर राजनीति के मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे है।

बताया जा रहा है कि अपने पारिवारिक सदस्यों और साथियों की जेल से रिहाई के बाद पूर्व जिला जज राम कुमार तिवारी न्यायिक सेवा से इस्तीफा देकर महासमुंद में कांग्रेस की टिकट पर चुनावी बिगुल फूंकने की तैयारी में है। फ़िलहाल सूर्यकान्त तिवारी, लक्ष्मीकांत तिवारी समेत अन्य परिजनों की रिहाई और अपनी राजनीति चमकाने में व्यस्त राम कुमार तिवारी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में बताई जाती है। बताते है कि अदालत में शासन का पक्ष मजबूत करने के बजाय विधि विभाग द्वारा ऐसी सलाह दी जा रही है, जिससे अदालत में केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ कांग्रेस के कतिपय नेताओं और संदेहियों का पक्ष मजबूत हो सके, भले ही छत्तीसगढ़ शासन की भद्द क्यों न पिटे। सूत्र बताते है कि आपराधिक तत्वों को ऑक्सीजन विधि सचिव ही मुहैया करा रहे है।

बताया जा रहा है कि रायपुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध अभियुक्त सूर्यकान्त तिवारी और सौम्या चौरसिया दोनों विधि सचिव राम कुमार तिवारी के नियमित संपर्क में है, उनकी सलाह पर ही हाई कोर्ट बिलासपुर और शीर्ष अदालत दिल्ली में कार्यरत कई न्यायिक अधिकारियो को प्रभावित किये जाने के प्रयास जोरो पर है। चर्चा है कि राम कुमार तिवारी की तैनाती के उपरांत से कोल माफिया निचली अदालतों में सेंधमारी करने लगे थे। उनकी कार्यप्रणाली और फैसलों की जांच की मांग लम्बे समय से की जा रही है।

बताते है कि अदालतों में सुनियोजित सेंधमारी भी की गई है। सूत्रों का दावा है कि साहब के ख़ुफ़िया तंत्र द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों का जमकर दुरूपयोग हो रहा है। न्यायिक अधिकारियो से संपर्क सूत्र स्थापित करने का बीड़ा खुद विधि सचिव राम कुमार तिवारी ने उठाया है। लिहाजा उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी बताया जा रहा है। हालांकि दूध का दूध और पानी का पानी तो जांच के बाद ही साफ हो पायेगा फ़िलहाल तो तिवारी गंभीर आरोपों के दायरे में बताये जाते है।

छत्तीसगढ़ में विधान सभा चुनाव सिर पर है, सभी राजनैतिक दल चुनावी दौडम-भाग में जुटे है, पुलिस प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता के बीच “जग्गी हत्याकांड” जैसा वातावरण निर्मित होने से छत्तीसगढ़ शासन की बेखबरी से जनता की सांसे फूली हुई है। लोगो की निगाहे ऑफिस ऑफ प्रॉफिट से मुक्त पुलिस मुख्यालय और राज्य के मंत्रालय में विराजमान चीफ सेकेट्री पर टिकी हुई है।

बताते है कि सौम्या चौरसिया के जेल की हवा खाने के बाद भी उनके कार्यालय में वीरानी छाई हुई थी। लेकिन अनिल टुटेजा के लापता होते ही मुख्यालय की खोई हुई ताकत फिर लौटती नजर आ रही है। बताते है कि पुलिस मुख्यालय और मंत्रालय के गलियारे में फिर लौटी “बहार”, देख कर जनता ने थोड़ी राहत की साँस ली है। लेकिन उसे कल्याणकारी राज्य की बयार का इंतजार है।

फ़िलहाल तो लोगो की निगाहे अदालत और जेल की दहलीज पर टिकी हुई है, इस उम्मीद में कि “अदालत बोलेगी”। बिलासपुर हाई कोर्ट में सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका पर बहस का दौर थमने ही वाला है, ऐसे में जेल या बेल का फरमान इस गरीब राज्य की तस्वीर बदलने में सहायक साबित होगा। क़त्ल की रात से पहले खबर आ रही है कि सौम्या का नाम सुनते ही पीड़ितों के रोंगटे खड़े हो गए है, नौकरशाहों की नींद हराम है, लेकिन अपराधियों के हौसले बुलंद और इरादे नेक नजर आ रहे है। अंदेशा इसी बात का है कि साहब पर शिकंजा, जल्द नहीं कसा गया तो, राज्य के किसी भी भू-भाग में कभी भी ठांय-ठांय ढिशुम-ढिशुम हो सकता है।

प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर की हालात से वाकिफ IPS शेख आरिफ, आनंद छाबड़ा, अजय यादव और स्टेट पुलिस सर्विस के क्राइम टीम प्रभारी अभिषेक माहेश्वरी पर नागरिको और केंद्रीय जाँच एजेंसियों के अधिकारियो की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बताई जा रही है।उम्मीद कि जा रही है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भरोसेमंद ये चारो अधिकारी ही साहब के अरमानो पर पानी फेरने के लिए कारगर साबित होंगे।

छत्तीसगढ़ में अपराधों की रोकथाम और अपराधियों की जेल से रिहाई के मामलों से लेकर नागरिको की जान माल की सुरक्षा को लेकर मौजूदा दौर में मुख्यमंत्री कार्यालय के विश्वस्त चारो अधिकारीयों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह देखना गौरतलब होगा कि जनता की हिफाजत के मामलों में संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन को लेकर चारो अधिकारी कितने खरे उतरते है,यह तो वक्त ही बताएगा।

इधर,छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अभियुक्त सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका पर सुनवाई के जल्द ख़त्म होने के आसार है। बताते है कि दोनों ही पक्षों की दलीलों के बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी,राज्य की सबसे ज्यादा चर्चित “लेडी डॉन” की बानगी के बीच “जेल या बेल” का बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है ।

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